लक्ष्मीकांत बेर्डे महाराष्ट्र के सुपरस्टार

 आज लक्ष्मीकांत भले ही हमारे बीच नहीं है लेकिन अभी भी लाखों दिलों पर राज करते हैं। खास बात है कि लक्ष्मीकांत सलमान खान की हर फिल्म की बैक बोन हुआ करते थे। लक्ष्मीकांत बेर्डे मराठी थिएटर के मशहूर कलाकार थे उसके साथ ही एक प्रसिद्ध अभिनेता भी थे जिन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों में लम्बे अर्से तक काम किया था। मराठी सिनेसृष्टीमें लक्ष्मीकांत बेर्डे जी को कोई ना जाने यह तो असंभव ही था, उनके अनोखे कॉमेडी टाइमिंग, एक्टिंग का कोई तोड़ नहीं था। मराठी जगत में लक्ष्मीकांत हास्य सम्राट और लक्ष्या नाम से प्रसिद्ध थे। हालाँकि लक्ष्मीकांत बेर्डे को जीवन भर एक हास्य अभिनेता के रूप में जाने जाते रहे क्योंकि उन्होंने हास्य भूमिकाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया लेकिन उन्होंने कई फिल्मों में गंभीर भूमिकाएँ भी सटीकता के साथ निभाई हैं।


 लक्ष्मीकांत बेर्डे का जन्म 26 अक्टूबर 1954 को रत्नागिरी में हुआ था। लक्ष्या उनके 5 भाई बहनों में से एक हैं। वह अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए बचपन में लॉटरी का टिकट भी बेचा करते थे। जब वह बड़े हुए तो उन्होंने बस कंडक्टर बनने का सपना देखा क्योंकि जब उन्होंने कंडक्टर के पास पैसों से भरा बैग देखा तो उन्हें लगा कि यह सारे पैसे कंडक्टर के ही होते हैं। बाद में उन्हें अभिनय में मजा आने लगा। गणेश उत्सव कार्यक्रम से उन्हें अभिनय का छोटा सा मंच मिला और उन्होंने अपनी भूमिकाएं निभानी शुरू कर दीं। इसके बाद उन्होंने स्कूल और कॉलेज के कई नाटकों में अभिनय किया और कई पुरस्कार भी जीते। 

उन्हें मुंबई मराठी साहित्य संघ से जुड़ने का सम्मान मिला और साथ ही उन्हें पेशेवर मंच पर अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर भी मिला। बेशक, यह मौका पाने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी। शुरुआत में उन्हें चौकीदारी का काम करना पड़ा था। नाटकों में काम करते हुए उन्होंने पुरूषोत्तम बेर्डे के नाटक "टूर टूर" में अभिनय किया और पूरे महाराष्ट्र में हिट हो गये। इस नाटक ने उन्हें अभिनय के क्षेत्र में एक नई पहचान दी। ऐसेही कई लोकप्रिय नाटकों के जरिए प्रशंसकों के दिलों में जगह बनाई। नाटकों में सारी व्यवस्था होते हुए भी वे संतुष्ट नहीं थे। उनकी फिल्मों में अभिनय करने की बहुत ही इच्छा थी।

जल्द ही उनकी फिल्मों में अभिनय करने की इच्छा फिल्म "लेक चालली सासरला" के रूप में पूरी हुई। यह उनकी पहली फिल्म थी। लक्ष्मीकांत बेर्डे की लोकप्रियता सीमित रही क्योंकि उनकी पहली फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही। फिर निर्माता/निर्देशक महेश कोठारे ने लक्ष्य का अभिनय देखा और उन्हें अपनी फिल्म "दे दनादन" में सहायक अभिनेता की भूमिका की पेशकश की। फिल्म और लक्ष्या दोनों सुपरहिट हुए। इसके बाद, उन्होंने महेश कोठारे की धूम धड़ाका में अशोक सराफ और महेश कोठारे के साथ अभिनय किया और अभिनय के कई दरवाजे उनके लिए खुल गए। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक हर कोई उनकी परफॉर्मेंस देख खूब हसते थे। सचिन पिलगांवकर निर्देशित फिल्म "अशी ही बनवाबनवी" में साड़ी में उनकी हास्य भूमिका ने दर्शकों पर छाप छोड़ी थी। उसके बाद अशोक सराफ और लक्ष्मीकांत बेर्डे ने मराठी सिनेमा पर बहुत अर्से तक राज किया था। उनकी जबरदस्त अभिनय क्षमता और अपार लोकप्रियता को देखकर उन्हें मराठी सिनेमा का महानायक कहा जाने लगा था।

धूमधडाका की सफलता के बाद उन्हें हिंदी फिल्मों के भी ऑफर मिलने लगे। उनकी पहली हिंदी फिल्म "मैंने प्यार किया" थी जो लोकप्रियता के शिखर पर पहुंची। फिल्म में लक्ष्या के हास्य अभिनय को विशेष रूप से सराहा गया था। इसी फिल्म से उनके हिंदी सिनेमा करियर की शुरुआत हुई, इसके बाद उन्होंने हम आपके हैं कौन, साजन जैसी फिल्मों में अजरामर भूमिकाए निभाई। मराठी और हिंदी करियर मिलाकर लक्ष्मीकांत ने 200 से ज्यादा फिल्में की। दिलचस्प बात है कि लक्ष्मीकांत फिल्मों में चाहे साइड रोल में रहते हों लेकिन फिल्म में उनकी भूमिका दमदार होती थी। सलमान की कई फिल्मों में उन्होंने नौकर का किरदार निभाया। हालांकि जबरदस्त अभिनय से वो नौकर नहीं हीरो बन गए। कभी-कभी तो उनका अभिनय हीरो पर भी भारी पड़ जाता था। अदाकारा भाग्यश्री ने कहा था कि लक्ष्मीकान्त बेहद अच्छे इंसान और डाउन टू अर्थ व्यक्ति थे। मैंने प्‍यार किया में काम के दौरान उन्होंने कभी भी यह जाहिर नहीं होने दिया था कि वो मराठी फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार हैं।

16 दिसंबर 2004 को लक्ष्मीकान्त बेर्डे यह दुनिया हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ गए थे। किडनी फेल होने के चलते 50 साल की उम्र में ही उनका निधन हो गया था। आज वह भले ही हमारे बीच ना हों, लेकिन पर्दे पर उनकी मौजूदगी की वजह से उनकी कमी नहीं खलती है। 

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